भारत के संविधान के Articles, Parts और Fundamental Rights — search करें और आसान भाषा में पढ़ें।
"हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता; प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए… दृढसंकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर, 1949 ईस्वी को एतदद्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"
| भाग (Part) | विषय (Topic) | अनुच्छेद (Articles) |
|---|---|---|
| भाग 1 | संघ और उसका राज्यक्षेत्र (The Union & its Territory) | अनुच्छेद 1 से 4 |
| भाग 2 | नागरिकता (Citizenship) | अनुच्छेद 5 से 11 |
| भाग 3 | मूल अधिकार (Fundamental Rights) | अनुच्छेद 12 से 35 |
| भाग 4 | राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles) | अनुच्छेद 36 से 51 |
| भाग 4A | मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) | अनुच्छेद 51A |
| भाग 5 | संघ सरकार (राष्ट्रपति, संसद, सुप्रीम कोर्ट) | अनुच्छेद 52 से 151 |
| भाग 6 | राज्य सरकारें (राज्यपाल, विधानसभा, हाई कोर्ट) | अनुच्छेद 152 से 237 |
| भाग 7 | पहली अनुसूची के भाग ख के राज्य (निरस्त/Deleted) | अनुच्छेद 238 |
| भाग 8 | संघ राज्यक्षेत्र (Union Territories) | अनुच्छेद 239 से 242 |
| भाग 9 | पंचायतें (Panchayats) | अनुच्छेद 243 से 243O |
| भाग 9A | नगरपालिकाएं (Municipalities) | अनुच्छेद 243P से 243ZG |
| भाग 9B | सहकारी समितियां (Co-operative Societies) | अनुच्छेद 243ZH से 243ZT |
| भाग 10 | अनुसूचित और जनजाति क्षेत्र (Scheduled & Tribal Areas) | अनुच्छेद 244 से 244A |
| भाग 11 | संघ और राज्यों के बीच संबंध (Relations between Union & States) | अनुच्छेद 245 से 263 |
| भाग 12 | वित्त, संपत्ति, संविदाएं और वाद (Finance, Property, Suits) | अनुच्छेद 264 से 300A |
| भाग 13 | राज्यक्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम | अनुच्छेद 301 से 307 |
| भाग 14 | संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं (UPSC & State PSC) | अनुच्छेद 308 से 323 |
| भाग 14A | अधिकरण (Tribunals) | अनुच्छेद 323A से 323B |
| भाग 15 | निर्वाचन (Elections / Election Commission) | अनुच्छेद 324 से 329A |
| भाग 16 | कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध (Special Provisions) | अनुच्छेद 330 से 342 |
| भाग 17 | राजभाषा (Official Language) | अनुच्छेद 343 से 351 |
| भाग 18 | आपात उपबंध (Emergency Provisions) | अनुच्छेद 352 से 360 |
| भाग 19 | प्रकीर्ण (Miscellaneous) | अनुच्छेद 361 से 367 |
| भाग 20 | संविधान का संशोधन (Amendment) | अनुच्छेद 368 |
| भाग 21 | अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध (जैसे पहले Art. 370) | अनुच्छेद 369 से 392 |
| भाग 22 | संक्षिप्त नाम, प्रारंभ, प्राधिकृत हिंदी पाठ और निरसन | अनुच्छेद 393 से 395 |
"राज्य" को व्यापक रूप से परिभाषित करता है ताकि मूल अधिकार केवल सरकार ही नहीं, बल्कि स्थानीय निकायों और उसके नियंत्रण वाल…
यह "न्यायिक पुनर्विलोकन" का अनुच्छेद है: कोई भी विधि — पुरानी या नई — जो मूल अधिकारों का उल्लंघन करती है, शून्य है। न्या…
कानून के सामने सब समान हैं। राज्य मनमाने ढंग से भेदभाव नहीं कर सकता; कोई भी वर्गीकरण उचित होना चाहिए और किसी वैध उद्देश्…
धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान आदि के आधार पर राज्य द्वारा भेदभाव पर रोक — पर महिलाओं, बच्चों और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्ष…
सरकारी नौकरियों में समान अवसर की गारंटी देता है, साथ ही सेवाओं में कम प्रतिनिधित्व वाले पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की अ…
अस्पृश्यता को हर रूप में पूरी तरह समाप्त करता है और इसके आचरण को दंडनीय अपराध बनाता है। यह उन कुछ अधिकारों में से है जो …
समानता बनाए रखने के लिए उपाधियों (जैसे औपनिवेशिक "राय बहादुर") को समाप्त करता है। सैन्य पुरस्कार और शैक्षिक डिग्रियाँ मा…
छह प्रमुख स्वतंत्रताएँ देता है — बोलने, सभा, संघ, संचरण, निवास और व्यवसाय की। प्रत्येक पर केवल लोक-व्यवस्था या सुरक्षा ज…
अभियुक्त के लिए तीन संरक्षण: पूर्वव्यापी दंड नहीं, एक ही अपराध के लिए दोहरा दंड नहीं, और स्वयं के विरुद्ध गवाही के लिए व…
संविधान का हृदय। प्राण और स्वतंत्रता केवल निष्पक्ष, न्यायसंगत और उचित विधिक प्रक्रिया से ही छीने जा सकते हैं। न्यायालयों…
6–14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बनाता है। 86वें संशोधन (2002) से जोड़ा गया और RTE अ…
गिरफ्तारी पर बुनियादी सुरक्षा देता है: कारण बताना, वकील तक पहुँच, और 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना। निवारक नि…
मानव तस्करी, बंधुआ/बलात् श्रम और बेगार पर रोक लगाता है। यह व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करता है और निजी व्यक्तियों के विरुद…
14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कारखानों, खानों या अन्य खतरनाक कार्यों में लगाने पर रोक — बाल श्रम के विरुद्ध एक प्रमुख …
अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, आचरण करने एवं प्रचार करने का अधिकार देता है — केवल लोक व्यवस्था, सदाचार और स्वास…
धार्मिक संप्रदायों को अपनी धार्मिक संस्थाएँ चलाने, धार्मिक मामलों का प्रबंध करने, संपत्ति रखने और उसका प्रशासन करने देता…
किसी को ऐसा कर देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जिसकी आय किसी विशेष धर्म के प्रचार में जाती हो। यह राज्य के पंथनिरपेक…
पूर्णतः राज्य-वित्त पोषित विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा पर रोक लगाता है, और राज्य-सहायता प्राप्त संस्थाओं के विद्यार्थिय…
किसी समुदाय के अपनी भाषा, लिपि या संस्कृति को बनाए रखने के अधिकार की रक्षा करता है, और राज्य/राज्य-सहायता प्राप्त विद्या…
धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों को अपनी शिक्षा संस्थाएँ स्थापित और संचालित करने का अधिकार देता है, और इस आधार पर राज्य सह…
मूलतः संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार के रूप में संरक्षित करता था। 44वें संशोधन (1978) द्वारा निरस्त; अब संपत्ति अनुच्छे…
एक रक्षा-उपबंध जो भूमि-सुधार और जागीर-अर्जन विधियों को अनुच्छेद 14 और 19 के उल्लंघन के लिए रद्द होने से बचाता है।
नौवीं अनुसूची में सूचीबद्ध विधियों को मूल अधिकार चुनौतियों से बचाता है — पर 1973 के बाद जोड़ी गई विधियों की समीक्षा हो स…
अनुच्छेद 39(ख)/(ग) के नीति निदेशक तत्वों को लागू करने वाली विधियों को अनुच्छेद 14 और 19 की चुनौती से बचाता है। इसका व्या…
डॉ. आंबेडकर ने इसे संविधान की "आत्मा" कहा। यदि कोई मूल अधिकार भंग होता है तो आप पाँच शक्तिशाली रिट के माध्यम से सीधे उच्…
संसद को सशस्त्र बलों, पुलिस और समान सेवाओं के लिए कुछ मूल अधिकारों को सीमित या समाप्त करने की अनुमति देता है, ताकि अनुशा…
संसद को उन अधिकारियों को विधिक संरक्षण (क्षतिपूर्ति) देने की अनुमति देता है जिन्होंने मार्शल लॉ वाले क्षेत्र में व्यवस्थ…
संसद को कुछ मूल अधिकार विषयों पर विधि बनाने और अस्पृश्यता तथा बलात् श्रम जैसे अपराधों के लिए दंड निर्धारित करने की अनन्य…