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Constitution Encyclopedia · Part III · Fundamental Rights

Article 31

संपत्ति का अनिवार्य अर्जन (निरस्त)

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मूल पाठ (Bare Act)

संपत्ति का अनिवार्य अर्जन (निरस्त)

अनुच्छेद 31 संविधान (44वाँ संशोधन) अधिनियम, 1978 द्वारा निरस्त कर दिया गया। संपत्ति का अधिकार मूल अधिकार नहीं रहा और अब यह केवल अनुच्छेद 300A के अधीन एक संवैधानिक/विधिक अधिकार है — किसी व्यक्ति को विधि के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।

आसान व्याख्या

मूलतः संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकार के रूप में संरक्षित करता था। 44वें संशोधन (1978) द्वारा निरस्त; अब संपत्ति अनुच्छेद 300A के अधीन एक विधिक अधिकार है, मूल अधिकार नहीं।
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